કોઈ નઝમ ૧૫
उसने हमसे पूछा , तेरी रज़ा क्या है ?
क्यों करते हो मोहब्बत , वज़ा क्या है ?
कैसे बताऊ उसे, मेरी खता क्या है
जो वज़ा से करे मोहब्बत “यार”, उससे मै मज़ा क्या है ।
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