કોઈ નઝમ ૨૬
ना करना कभी गुरुर
तू अपनी ऊँची उड़ान का ,
देखा है हमने भी अक्सर
हरे पत्ते सुख कर ख़ाक ही मिलते है ।
“नवाब”
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