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કોઈ નઝમ ૧૮

ख्वाहिशो से नहीं गिरते फूल झोली मे,
वक़्त की शाख को हिलाना होगा ।
कुछ नहीं होगा अंधेरो को बुरा कहेने से,
अपने हिस्से का दिया खुद ही जलना होगा।